पत्रकारिता क्षेत्र में हो रहे हमलो को लेकर पत्रकारों ने राज्यपाल के नाम पुलिस अधीक्षक को सौंपा ज्ञापन


तीन दिनों में कार्यवाही ना की गई तो धरना देने पत्रकार होंगे विवस

संपादक हेमराज विश्वकर्मा 

HR Times News नरसिंहपुर - वर्तमान समय में देखा जा रहा है कि सत्य खबरें लिखने और दिखाने पर आए दिन कई प्रकार के हमले किए जा रहे हैं कुछ हमले तो प्री प्लानिंग कर किए गए हैं । और उस प्री प्लानिंग में पीड़ित के ऊपर एफ आई आर दर्ज होना षड्यंत्र के तहत बताया गया है । ज्ञापन का उद्देश्य यह भी है कि आगामी यदि पीड़ित पत्रकार है तो  पुलिस विभाग को उस मामले में सही जांच कर मामले में कदम उठाना चाहिए ।  जिससे शासन का चौथा स्तंभ कहा जाने वाला वर्ग और पुलिस जो एक दूसरे के पूरक हैं एक दूसरे पर लांछन ना उठा सके। इससे दोनों पक्षों की छवि धूमिल होती है।

मंगल लोधी के मामले में पत्रकार द्वारा दिखाई गई वीडियो खबर को लेकर हुआ हंगामा

कुछेक पत्रकारों द्वारा पीड़ित मंगल लोधी जब पुलिस अधीक्षक कार्यालय अपनी पारिवारिक समस्या लेकर पहुंचा और उसने लिखित आवेदन दिया उसके आधार पर पत्रकारों ने खबर चलाई रही, और थाना कोतवाली के सामने एक पत्रकार पर महिलाओं द्वारा सार्वजनिक तौर पर मार-पीट कर कपड़े फाड़ दिए गए और वहां पुलिस मौजूद होने के बावजूद महिलाओं के हौसले बुलंद रहे । जो वीडियो में देखा जा सकता है । पुलिस को यह पावर भी नहीं है क्या ? यदि कोई झगड़ा हो रहा है तो अपनी ओर से उस झगड़े को अलग-अलग कर दिया जाए । यदि किया गया होता तो थाने ले जाने तक का वीडियो वायरल नहीं होता ।
           हैरानी की बात यह है कि पांच पांच पत्रकारों पर मामले दर्ज कराये गये, यह षड्यंत्र ही तो बताया जा रहा है जिसे लेकर कुछक पत्रकारों में अच्छा खासा रोष व्याप्त है। 

इन लोगों पर हुए मामले दर्ज 

कोतवाली थाना अंतर्गत मामले में दर्ज सालिकराम राजपूत, धर्मेन्द्र लोधी, राजकुमार दुबे एवं थाना करेली अंतर्गत 
चंद्रमोहन दुबे व चंद्रशेखर मालवीय पर एफ आई आर दर्ज हुई है । जो आज दिए ज्ञापन अनुसार दर्ज एफआईआर को निरस्त करवाने की मांग है आज बड़ी संख्या में पत्रकारों ने महामहिम राज्यपाल के नाम पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर पत्रकारों पर हुई दर्ज एफआईआर जो कि द्वेषपूर्ण कराई है । वह निरस्त हो । शासन का चौथा स्तंभ कहां जाने वाला पत्रकार धराशाही करने का जो अथक प्रयास चल रहा है वह सब जान ले कि यह संभव नहीं है । पत्रकार जान जोखिम में डालकर विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर करता है । इस कारण आए दिन उन्हें उन उक्त लोगों से खतरा बना रहता है। इसलिए पत्रकारों की सुरक्षा समूचे क्षेत्र में होनी चाहिए । धरातल पर कार्य कर रहे पत्रकारों के लिए ना तो कोई संस्थान सैलरी देता है और ना ही कोई सहयोग होता है और ना विभागों से होता है । उन विभागों में बैठे जिम्मेदार लोग पत्रकारों का हिस्सा डकार जाते हैं । इन हालातो में भी पत्रकार किसी भी तरह जनता की आवाज  पत्रकार उठाता है । और हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर करता है । इसलिए शासन प्रशासन को मिलकर सुरक्षा मुहैया कराई जानी चाहिए । और 15 दिवस के भीतर दी गई शिकायतों पर कार्यवाही कर पत्रकारों को जानकारी प्रदान करने का प्रावधान किया जावे। जिन पत्रकारों पर ब्लेकमेल के आरोप है उनकी मोबाईल लोकेशन, सी.डी.आर. निकलवाकर जांच हो, उक्त घटनाक्रम कोतवाली का है घटनाक्रम के 2 घण्टे पहले से रात्रि दस बजे तक थाने के अंदर-बाहर लगे सी.सी.टी.वी. कैमरों की फुटेज सुरक्षित रखी जावे। अंतः 3 दिवस में कार्यवाही ना होने पर धरना प्रदर्शन के लिये विवश होगे जिसकी जबावदारी शासन प्रशासन की होगी।

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