1 अक्टूबर 2024 दिन मंगलवार को कृषि उपज मंडी में होंगे किसान अनिश्चितकाल में धरना प्रदर्शन "ऋषि राज पटेल"
संपादक हेमराज विश्वकर्मा
HR Times New नरसिंहपुर सरकार के तानाशाही रवैया से तंग आए किसान बेहद परेशान है चाहे वह खाद की समस्या हो, समर्थन मूल्य की बात हो, या फसलों का C2+50 के आधार पर सही मूल्य मिलने की बात हो, महंगाई के अनुपात में किसानों कमाई को कम आका जा रहा है और है भी ! जिसके चलते राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार कक्का जी के आवाहन पर जिलेभर के किसान एक बार पुनः अपनी मांगों को लेकर मैदान में उतरने जा रहे हैं । शासन प्रशासन को किसानो की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए गंभीरता से लेना चाहिए और उनका समाधान करने अग्रेषित होना चाहिए किसान अपनी परेशानियों की चलते अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन करने बेबस है ।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसानों के अधिकार का हो रहा हनन
बताया जा रहा है कि यह धरना प्रदर्शन अहिंसात्मक व जन सहयोग और शांतिपूर्ण तरीके से राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के आवाहन पर जिले भर से किसान अपनी समस्या व मांगों को लेकर जन आंदोलन करने विवश हैं । आज प्रेसवार्ता में किसान संघ के प्रमुख लोगों ने मीडिया से रूबरू होकर अपनी समस्या व मांगों को बताते हुए कहा है कि 1 अक्टूबर दिन मंगलवार को जिले भर से किसानों का आगमन हो रहा है जो कि सरकार के तानाशाही रवैया के चलते किसान बेहद परेशान है जैसे सोयाबीन का भाव लागत के आधार पर₹7000 प्रति कुंतल किया जाना चाहिए और किसान की पूरी उपज खरीदी जानी चाहिए जो अभी तक नहीं हो रही है इसी प्रकार मक्का भी ₹3000 प्रति कुंतल कर समर्थन मूल्य पर खरीदी की जाए। ऐसी और भी किसानी संबंधित समस्याएं हैं जिसमें फसलों का शीघ्र सर्वे कराकर मुआवजा दिलवाना एंव जिले में आवारा बेसहारा मवेशियों एवं जंगली सुअरो द्वारा बड़े स्तर पर किसान की फसल नष्ट की जा रही है, ऐसी हर रबी और खरीफ की फसलों का सर्वे कराया जाए और बेसहारा मवेशियों को गौशाला पहुंचाया जाए एवं जंगली सुअरों पर नियंत्रण कानून लाया जाए, जिससे सुअरो के हमले से मजदूर या किसान घायल ना हो सके यदि होते हैं तो उन्हें₹100000 की सहायता राशि मिले और यदि उस घटनाक्रम में किसी की मृत्यु होती है तो 10 लाख रुपए की सहायता राशि उनके परिवारजन को मिले। खाद पाउडर को लेकर निर्धारित कीमतें हो और जिनका पक्का बिल दिया जाना अनिवार्य हो, गेहूं 2700 - 3000 रुपए प्रति कुंतल एंव धान ₹3000 कुंतल कर समर्थन मूल्य पर खरीद हो, पहले किए गए वादे पर सरकार खरी नहीं उतर सकी इसलिए शासन प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया जा रहा है ।
अधिक मात्रा में होता है गन्ना उत्पादन
गन्ना उत्पादन नरसिंहपुर में 65 प्रतिशत होता है इसलिए जिले में सरकारी शुगर मिल स्थापित की जाए, जिससे शासन को भी राजस्व मिल सके, गन्ना एक्ट अनुसार किसानों को 14 दिन के अंदर 7 प्रतिशत शुगर रिकवरी चेक करवाकर बढ़ती हुई रिकवरी के आधार पर बाजिव दाम दिलवाले जावे । और तत्पश्चात नियमअनुसार 7% ब्याज जोड़कर किसानों को गन्ना पिराई सीजन के पहले पूरा भुगतान कराया जाए । इतना ही नहीं किसानों को गुड भट्टियों के कारोबार को व्यवसायिक क्षेत्र से बाहर किया जाए और कृषि से जोड़ा जाए, जिससे टीसी कनेक्शन विद्युत कटाई से बचा जा सके और उसमें शासन से अनुदान भी मिले । खेत सड़क योजना के आधार पर किसानो के आवेदन प्राप्त होते ही उन गोहो पर मिट्टी डस्ट बजरा डलवाया जाए एवं चरनोंई की भूमि और सरकारी गोहे की भूमि भू माफियो से मुक्त कराई जाए, जिससे पशु वंश भी अपना जीवन यापन कर सके । वैसे तो किसान महसंघ द्वारा 32 मांगो को लेकर किसान मैदान में आ रहे हैं। देखना यह है कि शासन प्रशासन प्रदेश के अन्नदाताओं की कितनी मांगे स्वीकार करता है ।
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