आईसीआईसी बैंक द्वारा कूटरचित योजनाबद्ध तरीके से ग्राहक रामराज पटेल के साथ हुई हजारों रुपए धोखाधड़ी
संपादक हेमराज विश्वकर्मा
HR Times News नरसिंहपुर :- वैसे तो प्राइवेट बैंकों के संबंध में कई बार सुनने व पढ़ने मिलता है परंतु आईसीआईसीआई बैंक में इस तरह के मामले भी अब बार बार सुनने व पढ़ने मिलने लगे है । इससे बैंक की विश्वसनीयता पर बट्टा लगता है कि जिस बैंक में वर्षो से जिस ग्राहक का खाता चल रहा हो उसी ग्राहक के साथ आईसीसी बैंक के कर्मचारी की मिलीभगत के चलते ग्राहक के सेविंग खाता क्रमांक 076 401 502 402 के यूपीआई से मोबाइल बैंकिंग सिस्टम के मध्यम से ग्राहक का मोबाइल नंबर बदलकर उसके खाते से हजारों रुपए की राशि धोखाधड़ी कर गमन कर ली गई।जिसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक नरसिंहपुर को 29-6-2024 को की गई। शिकायतकर्ता को एक्नॉलेजमेंट नंबर 32 10 62 40019665 मिला उसके अनुसार शिकायत पत्र मीडिया संस्थान में जारी किया गया, शिकायतकर्ता रामराज पटेल ने आईसीआईसीआई बैंक के कर्मचारी पर आरोप लगाते हुए कहा कि दोषी के विरुद्ध कड़ी वैधानिक कानूनी कार्यवाही हो जिससे इस तरह की पुनरावृत्ति किसी दूसरे अन्य ग्राहक के साथ ना हो सके । शिकायतकर्ता रामराज पटेल ने दिनांक 21-6-2024 को इतवारा बाजार शाखा में पहुंचकर काउंटर पर उपस्थित कर्मचारी को अपने खाते में हुई हेराफेरी की राशि के संबंध में बताया तो कर्मचारी का कहना था कि कभी-कभी मैसेज नहीं आते ऐसा सुनकर ग्राहक अचंभा खा गया और बैंक के कर्मचारियों को अवगत कराया कि एटीएम से राशि निकालने के मैसेज नहीं आते हैं, और यूपीआई इंटरनेट सिस्टम से रामराज पटेल के खाते से हेराफेरी कर आहरित राशिया निकली गई । जिनके मैसेज ग्राहक के मोबाइल पर आना था,जो नहीं आ रही है लेकिन बैंक कर्मचारीयों की हठधर्मिता के चलते ग्राहक को आखिर हजारों रुपए की चपत लग ही गई।
कर्मचारी की सांठ-गांठ के चलते बदला ग्राहक के खाते से मोबाइल नंबर, हुई हजारों रुपए की लूट
बैंककर्मियों की सांठ-गांठ के चलते मोबाइल नंबर बदलकर उक्त ग्राहक के खाते से कई बार राशि निकाली गई जिनके स्क्रीनशॉट भी उपलब्ध है।
धोखाधड़ी कर सात बार निकाली राशि
उक्त संबंध में पटेल के सेविंग खाता क्रमांक 076 401 502 402 में आई सी आई सी बैंक कर्मचारी की मिलीभगत के चलते कूटरचित योजनाबद्ध तरीके से यूपीआई ऑनलाइन बैंकिंग सिस्टम के माध्यम से ग्राहक के सात- बार में कुल 15276 रूपए ट्रांज़ैक्शन द्वारा निकाले गए । यह हेराफेरी नहीं तो क्या है साहब ? अब दोबारा पुनरावृति ना हो, और उक्त आवेदक की राशि मिल जावे व जिम्मेदार दोषी स्टॉप पर (कठोर दंडात्मक) कानूनी वैधानिक कार्यवाही होनी चाहिए ।
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