बैंक की विश्वसनीयता,व छवि बचाना है तो,बीच की कड़ी (दलालों)को करना होगा दूर
HR Times News नरसिंहपुर = वैसे तो आए दिन बैंकों में लोन संबंधी व मृत्यु दाबा जैसे कार्यों को लेकर बैंक कर्मचारी एवं अधिकारी ही अपने बीच में एक ऐसी कड़ी रखते हैं, जिसे दलाल कहा जा सकता है, परंतु यह दलाल बैंक परिसर के बाहर रहे तो भी बात बनती है, लेकिन वर्तमान समय में देखा व सुना जाता है कि कई दलाल बैंकों के अंदर जाकर अधिकारी वर्ग व कर्मचारी वर्ग से इस तरह तालमेल बनाए हुए हैं, कि दोनों के अलावा ग्राहक नाम की कोई छवि ही नहीं है । ग्राहक को तो कूड़ा कचरा समझ रखा है । और बैंक के अधिकारी कर्मचारी भी अब इस हठधर्मिता पर आ चुके हैं कि बैगर दलालों के ग्राहक का कार्य होना बमुश्किल होने लगा है ।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार पंजाब नेशनल बैंक ऑफ इंडिया करेली शाखा में पिछले कुछ सालों लगातार बैंक के अंदर, दलालों ने हब बना रखा है और बैंक के अधिकारी दलालों का भी भरपूर सहयोग करने में कोई कसर छोड़ते नजर नहीं आते । खवरे भी उन्हीं लोगों से मिल रही है।
बीते दिनों करेली से एक पत्रकार कवरेज करने पंजाब नेशनल बैंक करेली शाखा पहुंचा इस पर एक कहावत यहां चरितार्थ होती नजर आई है कि- ""मन मैला, तन ऊजरा, भाषण लच्छेदार , ऊपर सत्याचार है, भीतर भ्रष्टाचार ।
झूठो के घर पंडित बांचें, कथा सत्य भगवान की, जय बोलो बेईमान की"
जहां पर वर्षो से लोन जैसे मामलों में भ्रष्टाचार चल रहा हो उस बैंक के अधिकारी से मीडिया कर्मी अनुशंसा लेकर बैंक में कवरेज करेंगे तो क्या कर पाएंगे साब जी ? इस बैंक का यह पहला भ्रष्टाचार नहीं है, यहां पर ऐसे कई मामले मीडिया के सामने आए, लेकिन बैंक की विश्वसनीयता बनी रहे, इसीलिए मीडिया ने भी मामले को अभी तक नहीं उछाला रहा । परंतु अब भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा अधिकारी कर्मचारी वर्ग लॉग चुके है, यह मिलीभगत बैंक कर्मचारीयों को शोभा नहीं देता । आखिर यह दलालों का अड्डा बना रहा तो शासन की ही राशि का तो बंदरबांट करेंगे ।
बीच की कढ़ी बनाने में बैंक का बताया गया योगदान
बताया जाता है कि जिन दलालों को बैंक ने शरण दी है उन्ही दलालों की वजह से आज तक कई हितग्राहियों के साथ धोकाधडी की गई । ऐसा किसी एक या दो हितग्राहियों के साथ नही बल्कि दर्जनों हितग्राही ऐसे कारनामे हो चुके है जिनके नाम से बैंक ने लोन कर दिया है, और खाते से पैसा भी निकल गया है, लेकिन बड़ी बात तो यह है कि हितग्राहियों को लोन संबंधी बात पता ही नही, कि उनके नाम पर बैंक ने लोन कर दिया है।
ऐसी स्थिति में पंजाब नेशनल बैंक करेली पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है जो कि चिंताजनक है। अंतः पंजाब नेशनल बैंक करेली ने लोन तो कर दिया, परंतु लोन की राशि अपने किस चाहते हितग्राही के खाते में भेजी है। यह भी तो बता दें । हैरानी की बात यह है कि जिस हितग्राही के नाम लोन हुआ है उस लोन की किस्त कौन जमा कर रहा है, यह खेल नहीं तो क्या है साहब ? और यह खेल बगैर मिलीभगत के कैसे हो सकता है इतना ही नहीं यह सारे खेल बैंक के अंदर दलालों की साथ बैठकर खेले जाने की खबरे मिली है ।
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