नेशनल हाईवे NH 22 गाडरवारा से पिपरिया मार्ग दुर्दशा का शिकार जल्द हो सुधार

10 दिन में उड़ा दिए रेत कंपनी ने रोड के फरखच्छे, राहगीर हलकान,जहां देखो वहां भारी कीचड़ और गड्डे 
संपादक हेमराज विश्वकर्मा

संवाददाता विमलेश श्रीवास की रिपोर्ट

HR Times News सालीचौका  :- समीपस्थ नेशनल हाईवे एन एच 22 गाडरवारा से पिपरिया मार्ग कुछ महीने पहले मैन हाईवे रोड का सुधार हुआ था। चंद दिनों में ही यह हाईवे रोड दुर्दशा का शिकार हो गया और जहां देखो गड्ढे नुमा में तब्दील देखा जा रहा है ।

जैसे तैसे शासन प्रशासन संबंधित विभागीय अमले ने इस हाईवे रोड पर  गिट्टी डामरीकरण रिपेयरिंग की । और जिले में चल रही रेट कंपनी के रेट से भारी वाहन द्वारा रोड के परखच्चे इस तरह उड़े की स्वयं देखा जा सकता है
आज इस रोड की हालत यह है जो नेशनल हाईवे 22 के नाम से जाना जाता है और यहां शिवमंदिर चौराहे  के नाम से जाना जाता है ।
              ठीक इसके नजदीक दूधी नदी की रेत उठाने वाले ठेकेदारों का एवं खनिज विभाग का चेकपोस्ट नाका चौराहा का बोर्ड भी लगा हुआ है और रहीगीरों को मुसीबतें हो रही है लेकिन प्रशासनिक तंत्र व राजनीतिक तंत्र की आंखों में यह नहीं दिख रहा है कि मेंन रोड पर दलदल बना हुआ है।
यह नाका इसलिए बनाया गया है की रेत ठेकेदारों की रेत के डंपर ट्राली यहां चेक होते हुए निकले लेकिन रेत ठेकेदारों की मनमानी की चलते यह रोड पर ज्यादा मात्रा में गाड़ियां खड़ी होती हैं । जिससे रोड बाधित होता है आवागमन वालों को तकलीफ होती है एवं रेत भी डंपरों से निकालकर रोड किनारे बड़ी मात्रा में डंप कर दी जाती है।
दूसरी और रेत से भर डंपरों से नदी का पानी रेत के साथ आता है जिससे पूरी रोड कीचड़नुमा हो गई है। और रोड पर गड्ढे ही गड्ढे कर दिए गए जिससे आवाजाही करने वाले लोगों को वाहनों को चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है । शासन प्रशासन इस ओर ध्यान आकर्षित करते हुए रेत ठेकेदारों को कुछ नियम से काम करने का आदेश करें।
ताकि इस रोड का सत्यानाश होने से बच सके। यह पूरी रोड कुछ महीने पहले ही ठीक हुई थी । अव तकरीबन 300 फुट की रोड जो साफ सुतरी बनी हुई थी  डंपरों ट्राली ट्रक ने उसको कचरा बनाकर रख दी है  ।


*अव तो कीचड़ ही कीचड़ युक्त हो गई रोड*
रोड पर गड्ढे गड्ढे  कर दिये  गये जाम की समस्या अगल रहती है।लोगों का कहना है कि रेत ठेकेदार कंपनी को नियम से कार्य करने के आदेश लागू करें या फिर इस रेत नाके को दूसरी जगह स्थानांतरण करें। जिससे आवाजाही करने वाले वाहनों को व यात्रियों को परेशानी ना हो सके ।

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