उप स्वास्थ्य केंद्र मैं पदस्थ कर्मचारियों की तानाशाही, भुगत रही स्थानीय आवाम, उच्चाधिकारी दें ध्यान करकबेल
संपादक हेमराज विश्वकर्मा
HR Times News नरसिंहपुर :- वैसे तो शासकीय उप स्वास्थ्य केंद्र करकबेल लंबे समय से गोरखधंधे के मामले में बहुचर्चित है ।यहां पर स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर के ना रहने पर नर्सों की मनमानी चरम पर होती है । और मरीज भटकते रहते हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार सरकारी उपस्वास्थ्य केंद्र करकबेल में डॉक्टर होने के बावजूद डॉक्टर अस्पताल से नदारद रहना उचित नहीं है इससे स्थानीय मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है डॉ अनीता पटेल जोकि वर्तमान में 3 दिन इनके सुनिश्चित हैं । परंतु वह एक भी दिन अस्पताल में नहीं पहुंच रही है । और डॉक्टर की अनुपस्थिति मैं नर्सों द्वारा डिलीवरी के मामले में मनमानी राशि वसूल करती हैं । स्वास्थ्य केंद्र में जो फ्री डिलीवरी होना चाहिए, यदि कोई मरीज पैसा नहीं देता तो उसके प्रसूति सहायता की राशि को रोक दी जाती है और उन कर्मचारियों द्वारा धमकाया भी जाता है , यहां पदस्थ कर्मचारी डिलीवरी कराने वाली महिलाओं को धमकाकर मनमानी राशि ले रही है । उच्च अधिकारी अपना ध्यानाकर्षित करें ।
लापरवाही की सीमाएं पार
इधर जिस नर्स की दिन की ड्यूटी स्वास्थ्य केंद्र में रहती है, वह मरीजों को उपस्थित कभी नहीं मिलती है। यही मंजर (हालात) रात की ड्यूटी के दौरान भी देखा जाता है । जब मरीज व डिलीवरी वाली महिलाएं आती है तो यहां वहां भटकती रहते हैं कहीं अस्पताल के दरवाजे खटखटाते है तो कहीं समय कटाते यहां वहां दिखाई देते हैं। कई बार तो ऐसा देखा गया कि वह वापस घर लौट गए, और घर पर ही डिलीवरी हो गई, इस डिलीवरी को कराने वही शासकीय कर्मचारी फोन कर बुलाने पर मोटी रकम मरीजों के घर जाकर ले रही हैं । जब ऐसी स्थिति है तो करकबेल उपस्वास्थ्य केंद्र बंद कर शासन की खर्च हो रही राशि को रोकना चाहिए । इन्हीं में से कहीं स्वास्थ्य केंद्र में आई दवाइयां मेडिकल पर सेल आउट की जाती है। या फिर मरीजों को राशि लेकर थोप दी जाती है ।
बगैर रोस्टर चल रहा उप स्वास्थ्य केंद्र करकबेल
सभी जानते हैं कि डॉक्टर को भगवान से कम नहीं आंका जाता लेकिन जब वही भगवान अपने निजी स्वार्थ के चलते उन दुखीयारों को लूटेगा, तो कहां तक भगवान को कोई पूछेगा । वैसे भी डॉक्टरों के हाथ में सिर्फ वैसा ही रहा और रहेगा क्योंकि छवि तो धूमिल ही होती जा रही है यह पूरी मेडिकल लाइन की छवि हो रही है इसमें सुधार लाने की आवश्यकता है जो गड़बड़ियां हो रही है उन पर उच्च अधिकारियों को अंकुश लगाना चाहिए। हम बता दें कि उप स्वास्थ्य केंद्र करकबेल में रोस्टर का पता ही नहीं कहां लगा हुआ है । और कब वहां पदस्थ कर्मचारी ड्यूटी पर आते हैं व कब जाते हैं ना तो कोई समय सीमित है और ना ही कोई सुविधाएं साब जी।यदि उच्च अधिकारी इस ओर अपना ध्यानाकर्षित नहीं करेंगे तो निश्चित ही मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पाएगा और शासन की राशि बंदरबांट यहां पदस्थ कर्मचारी करते रहेंगे और स्थानीय आवाम को लूटते रहेंगे ।
स्वास्थ्य केंद्र में बैठकर लिख रहे बाहरी मेडिकल की दवाएं
लंबे समय से चर्चा में है कि अस्पताल मैं दवाई भी मरीजों को उपलब्ध नहीं कराई जा रही है और वहां बैठे जिम्मेदार बाहर की दवाइयां अधिक लिख रहे हैं प्रसव कराने वाली महिलाओं को भी बाहर की दवाइयां उपयोग में लेनी पड़ रही है ।
जब हमारा प्रतिनिधि स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा तो वहां एक और जानकारी मिली कि महिलाओं की डिलीवरी घर पर ही होती है। और मिलीभगत कर अस्पताल की नर्सों द्वारा उनके नाम सरकारी रजिस्टर मैं दर्जकर उन महिलाओं के नाम राशि निकाल दी जाती है और अपनी अपनी हिस्सेदारी को राशि निकालकर बांट ली जाती है ।इस तरीके की भर्राशाही इस उप स्वास्थ्य केंद्र करकबेल में चल रही है ।खबर प्रकाशन का उद्देश्य इतना है कि स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाएं उपलब्ध कराएं और समय सीमा सुनिश्चित की जाए जिसमें की वहां की जनता को सुविधाएं मिल सकें और यदि यह नहीं हो सकता तो इस से अच्छा है कि स्वास्थ्य केंद्र बंद कर दिया जाए साब जी।
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