105 साल से दमोह तेंदूखेड़ा की पहचान बनी बम्होरी ग्राम का दंगल मैदान

दमोह/तेंदूखेडा़
संवाददाता-लक्ष्मण रैकवार
 तेन्दूखेड़ा नगर से तीन किमी दूर ग्राम बम्होरी का दंगल मैदान 105 सालों से ब्लाक की पहचान बना हुआ है। कुछ साल पहले ग्राम के नव युवक इस मैदान में जोर अजमाइश कर कुश्ती के दाव-पेंच सीखते थे, इसके बाद दंगल के दिन कुश्ती में बाजी मारते थे, लेकिन आधुनिकता के चलते कारण कुश्ती पर रूझान कम होता जा रहा है। हालांकि हर साल जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सागर, दमोह सहित कई जिलों के अनेक पहलवान बम्होरी ग्राम के दंगल मैदान में अपना जोर अजमाने आते हैं। साथ ही पहलवान कुश्ती जीतकर शील्ड एवं बड़े-बड़े इनाम नेताओं और जनप्रतिनिधियों के हाथों से लेकर जाते हैं। कुश्ती देखने हजारों की संख्या में लोग यहां आते हैं। दंगल के दिन ग्राम में पैर रखने की जगह नहीं होती है।
गौरतलब है कि अंग्रेजों के समय से लगभग 105 सालों से ग्राम बम्होरी में जन्माष्टमी के दिन से भगवान ठाकुरजी का विमान रखने की शुृरूआत हुई थी। ठाकुरजी का विमान जन्माष्टमी के बाद अष्टमी ग्यारस को धूमधाम ने भगवान ठाकुरजी का विमान निकाला जाता है। विमान रखने की प्रथा आज भी जगतसिंह का परिवार निभाते आ रहे हैं। इसी दिन भगवान के विमान के साथ दंगल का आयोजन किया जाता है। जिसमें कई जिले के पहलवान जोर अजमाने आते हैं। जगत सिंह ने बताया कि पूर्वज पहलवान थे और पूर्वजों के समय से कुश्ती की परंपरा चली आ रही है। विमान विसर्जन के दिन कुश्ती कराने दंगल के आयोजन की शुरूआत की थी। दंगल की शुरूआत के कुछ सालों के बाद ही दंगल का इतना प्रचार प्रसार हुआ कि ग्राम में हर साल दंगल का बड़ा आयोजन होने लगा। यहां पर बड़े-बड़े पहलवान कुश्ती लड़ने आने लगे थे। इसके अलावा ग्राम के अनेक युवा भी कुश्ती के दाव पेंच सीखकर दंगल में कुश्ती लड़ने में हिस्सा लेते हैं। बहुत पहले ग्राम के लोग चंदा से भगवान का विमान रखते थे लेकिन पूर्वजों ने कुछ एकड़ जमीन भगवन के दंगल के नाम कर दी थी, तब से हमारे घर में भगवान का विमान रखा जाने परंपरा शुरू हुई जिसके चलते आज विमान धूमधाम के साथ निकाला जाता है। साथ ही दंगल का आयोजन । इस आयोजन पूर्व सांसद चंद्रभान सिंह गुबरा के राजसाव लक्ष्मी नामदेव  सहित सभी जनप्रतिनिधि मौजूद रहकर दंगल में कुश्ती के निर्णय के बाद पूर्व सांसद चंद्रभान सिंह के द्वारा इनाम वितरित किए गए।

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