अवैध शराब और सटोरियों का सिंहपुर चौकी क्षेत्र में लगी भरमार, क्षेत्रीय जनता हो रही बर्बाद परिवारजनों को हों रही पीड़ा,पुलिसया तंत्र फेल

माफिया वर्ग का स्थान सहित समाचार पत्र द्वारा सूचना देना, और इनका एक्शन ना लेना,अधिकारी की निरंकुश विभाग की हो रही छवि धूमिल "सिंगपुर चौकी"


नरसिंहपुर। जिला मुख्यालय में पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीणा द्वारा लगातार अवैध गतिविधियों को रोकने ऑपरेशन थानाबार चलाया जा रहा है वहीं थाना स्टेशन गंज अंतर्गत आने वाली सिंगपुर चौंकी क्षेत्र के कई ग्रामों में लगातार अवैध गतिविधियों को देखा जा रहा है और गांव गांव से अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों के नाम सहित बताएं जा रहे हैं बावजूद पुलिस अधीक्षक श्री मीणा जी द्वारा चलाए जा रहे अभियान को पलीता लगाया जा रहा है और चौकी में पदस्थ संपूर्ण स्टाफ निरंकुश अवैध गतिविधियों को संचालन करने वाले व्यक्तियों को खुली छूट दे रखे हैं बीते दिनों पहले दैनिक जयलोक अखबार में प्रकाशित खबर को लेकर थाना प्रभारी सौरभ पटेल के वर्जन के साथ सूचित भी किया गया था परंतु इन के आदेश पर सिंहपुर चौकी क्षेत्र में अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई जबकि इन चौकी प्रभारी एवं नगर निरीक्षक को उन लोगों के नाम और पता सहित अवगत कराए गए थे विश्वसनीय सूत्रों द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार माफिया वर्ग के लोग निम्नानुसार है 
नितिन चौकसे भैंसा,हेमंत पटेल दोनों पार्टनर यह कल्याणपुर टिगट्डा भैंसा से लेकर आसपास के कई ग्रामों में लोगों को एक के अस्सी करने का लालच देकर लोगों के घर बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हालत यह है की सिंहपुर चौकी के सामने पान दुकान से लेकर बाजार भर में संतोष चौकसे और प्रदीप कहार जैसे लोग इस कारोबार को अंजाम दे रहे हैं । पूर्व में प्रकाशित खबर पर सिंहपुर चौकी द्वारा कोई ठोस कार्यवाही हुई होती तो यह कारोबारी खुलेआम रोड और बीच बाजार पर यह कारोबार नहीं कर पाते लेकिन धनबल के चलते यह कारोबार खाकी वर्दी द्वारा चालवाने के संकेत दिए जा रहे हैं । बता दें कि सिंहपुर के सट्टा माफिया ने तो खुलकर यह भी कहा है की पुलिस से परमिशन ली है आप कौन होते हैं छापने वाले पुलिस रहेगी तो करेंगे नहीं तो बंद कर देंगे ।


गांव गांव क्षेत्र घर में पड़ोसी जा रही अबैध शराब

क्षेत्र भर के तकरीबन संपूर्ण ग्रामों में अवैध शराब इस तरह पड़ोसी जा रही है यह अमृत हो लेकिन जिम्मेदारों के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है और माफिया वर्ग से पुलिस के ताल्लुक इस तरह झलकते हैं जैसे यह इनके अन्नदाता हैरानी की बात तो यह है कि पुलिस अधीक्षक के आदेशों की उनके ही अधीनस्थ कर्मचारी इस तरह ताक पर इस रख देते हैं जैसे कोई ऐसे ही बोल हो । ऐसी स्थिति में पुलिस अधीक्षक को चाहिए कि अपने ही अमले पर मजबूती से शिकंजा कसा जाए । जिसमें क्षेत्रवार जनता अपनी गाढ़ी कमाई अपने बच्चों तक पहुंच सके और घर-घर में पियक्कड़ और सटोरिए पैदा ना हो सके ।

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