जिला पंचायत अध्यक्ष को बाजू में खिसकाकर,भाजपा नेता बैठे फ्रंट रोल पर, शासकीय बैठकों में प्रोटोकॉल का उल्लंघन, जमा रहे रौप
संपादक हेमराज वश्वकर्मा
HR Times News नरसिंहपुर वैसे तो जिले में शासकीय अधिकारीयों को देखा जाए तो बहुतायत संख्या में महिला अधिकारी जिलें में पदस्थ हैं वहीं दूसरे ओर ध्यानआकर्षित किया जाए, तो जिला पंचायत अध्यक्ष जिसे राज्य मंत्री का दर्ज माना जाता है उस पद पर पदस्थ बैठकों में बैठने को सीट के लिए मुंह ताकती देखी जाएं है और सत्तारूढ़ पार्टी के महामंत्री डॉ. पटेल जो कोई निर्वाचित जनप्रतिनिधि भी नहीं है वह जिला पंचायत अध्यक्ष से प्रोटोकॉल में आगे शीर्ष पर बैठे दिखाई देते हैं जिम्मेदारों को सोचना चाहिए की बार-बार इन्हें इग्नोर क्यों करना जो कि जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। हैरानी की बात तो यह है कि पार्टी के महामंत्री विराजमान है और अपनी अलौकिक शक्ति दिखाकर रौप फैला रहे है जो विचारणीय है । 21 अक्टूबर को जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक के बाद चर्चाओं में यह बात शुमार रही कि आदिवासी महिला जिला पंचायत अध्यक्ष का लगातार अपमान सत्तासीन पार्टी के पदाधिकारी निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष को दरकिनार करते हुए दिशा समिति जो कि पूर्व जिला सतर्कता एवं निगरानी समिति कहलाती थी और ग्रामीण विकास मंत्रालय में आती थी उसी विभाग के मुख्य जनप्रतिनिधि जिला पंचायत को बाजू में खिसकाकर भाजपा पार्टी पदाधिकारी फ्रंट रोल में बैठकर शासकीय बैठकों में अपना प्रभाव जमा रहे है। ज्ञातव्य हो कि कलेक्टर महिला अपर कलेक्टर महिला पुलिस अधीक्षक महिला जिला योजना अधिकारी महिला सामाजिक न्याय एवं निःशक्त कल्याण अधिकारी अंजना त्रिपाठी महिला एस एस डी ओ पी महिला अधिकारी पुलिस लाइन की आर आई महिला अधिकारी हैं। और जिले में महिला सशक्तिकरण की बात करने बाली भाजपा संगठन के पदाधिकारी ही महिला जनप्रतिनिधियों को दरकिनार करके उनके अधिकारो का उपयोग न कर सके इसलिए उन्हें मानसिक डैमेज कर रहे है और शासन की अति महत्वपूर्ण बैठकों में जिला पंचायत के ही विकास कार्यों की समीक्षा एवं निगरानी की जाती है जो कि पूर्व में *जिला सतर्कता एवं निगरानी समिति* कहलाती थी और भारत सरकार पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा गठित समिति भी रही । जो कि यूपीए सरकार के समय से गठित की जाती है जिसकी अध्यक्षता सांसद करते है । और चर्चा में यह भी है कि ज़िला पंचायत के समस्त विभागों की समीक्षा की जाती है जो अब जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) कहलाती है उसी में सर्व विभागों की प्रमुख जिला पंचायत की निर्वाचित जनप्रतिनिधि जिला पंचायत अध्यक्ष को ही दर्शक बनाकर बैठाया जाता है ।
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