खाद्य दिवस परपरमपिता परमात्मा शिव की स्मृति किए गए दीप प्रज्वलन राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी प्रीती दीदी
संपादक हेमराज विश्वकर्मा
HR Times News नरसिंहपुर :- अंतरराष्ट्रीय संस्था प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र दिव्य संस्कार भवन नरसिंहपुर में विश्व खाद्य दिवस मनाया गया,कार्यक्रम का शुभारंभ परमपिता परमात्मा शिव की स्मृति में दीप प्रज्वलन के साथ किया गयाl राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी प्रीती दीदी जी की गरिमा में उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भ्राता विशाल मेषराम (सीनियर साइंटिस्ट कृषि विज्ञान केंद्र नरसिंहपुर), डॉ निधि वर्मा (साइंटिस्ट एग्रोनॉमी कृषि विज्ञान केंद्र) , बहन शिल्पी नेमा (ए डी ए आत्मा परियोजना), भ्राता राकेश दुबे (उन्नतशील कृषक,करताज),भ्राता कृष्ण पाल पटेल (उन्नतशील कृषक,चिरचिटा) सहित अनेक अन्नदाता किसान भाई बहन ब्रह्माकुमारी परिवार के भाई बहन भी उपस्थित रहेl
बीके विनीता दीदी द्वारा उपस्थित सभी अतिथियों का तिलक और बैच लगाकर स्वागत किया गया उसके पश्चात बाल कलाकारों द्वारा स्वागत नृत्य भी प्रस्तुत किया सर्वप्रथम ब्रह्माकुमारी विनीता दीदी द्वारा संस्था का परिचय दिया गया की कैसे प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय पिछले 88 वर्षों से सतत ईश्वरीय सेवा में और जन सेवा में विश्व के पांचो महाद्वीपों पर लगभग 140 देश में 8000 से अधिक सेवा केन्द्रों के माध्यम से अपनी सेवाएं प्रदान कर रहा है जिसमें निरंतर सभी वर्गों के उत्थान और जागरूकता के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होता रहता है दीदी ने बताया की खाद्य पदार्थ के महत्व और उपयोगिता के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 16 अक्टूबर को प्रतिवर्ष विश्व खाद्य दिवस के रूप में मनाया जाता हैl
ब्रह्माकुमारी प्रीती दीदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज आवश्यकता है खाद्यान्न के प्रति सभी की जागरूकता की हम क्या खा रहे हैं और कैसे खा रहे हैं इस पर ध्यान देना बहुत आवश्यक है क्योंकि हम जो खाते हैं उसका सीधा असर हमारे मन पर होता है और मन का असर तन पर होता है,इसलिए बहुत आवश्यक है कि हम कुछ महत्वपूर्ण बातों पर विशेष ध्यान दें सर्वप्रथम हम सुनिश्चित करें कि हम जो खाद सामग्री लाते हैं उसके लिए पूरी ईमानदारी से कमाए हुए धन का ही उपयोग हो, दूसरा हम जो खाते हैं वह पूर्ण रूप से सात्विक भोजन हो शुद्ध शाकाहारी,तीसरा भोजन परमात्मा की स्मृति में अच्छे विचारों को मन में रखते हुए पूरी सफाई से बनाया गया हो ताकि वह भोजन न बनकर प्रभु प्रसाद बन जाए और चौथी महत्वपूर्ण बात कि हम जब भोजन स्वीकार करें तो सभी के प्रति हमारे मन में धन्यवाद का भाव हो, सर्वप्रथम भगवान को भोग स्वीकार कराया जाए और बनाने वाले को,अन्नदाता किसान को सभी को दिल से धन्यवाद देते हुए भोजन ग्रहण करेंl
और यह भी ध्यान रखें कि थाली में भोजन व्यर्थ ना बचे,जितना हम खा सके उतना ही ले ताकि उसका सही उपयोग हो सके और जरूरत मंद लोगों को भी भोजन प्राप्त हो सके l
भ्राता विशाल मेषराम ने शुभकामनायें देते हुए कहा कि आज आवश्यकता है हमारे किसान भाई भी धीरे-धीरे जैविक खेती को अपनाए ताकि सभी को शुद्ध सात्विक भोजन प्राप्त हो l
इसी श्रंखला में जैविक खेती कर रहे उन्नतिशील किसान भ्राता राकेश दुबे ने कहा कि सभी किसान भाई चाहते हैं कि वो भी बिना रसायन के शुद्ध अनाज का उत्पादन करें लेकिन बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ की जिम्मेदारी के कारण उन्हें अधिक उत्पादन करने के लिए रासायनिक उत्पादों का उपयोग करना पड़ता है l
इसके पश्चात सभी को सात्विक भोजन करने औऱ अनाज की बर्बादी को रोकने के लिए जागरूक रहने की सपथ दिलाई गई l
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