नगर की राजनीति में नेतृत्व क्षमता की कमी है क्या....?

गांव का जोगी जोगड़ा ऑन गांव में सिद्ध, नर.विधायक कैसा हो, "प्रवासी या स्थानीय"
संपादक हेमराज विश्वकर्मा

HR Times News नरसिंहपुर  :- उक्त परिस्थितियों को देखते हुए स्थानीय नेता का विधायक प्रत्याशी होना चाहिए, जिसमें क्षेत्र का सुनियोजित विकास हो सकेगा, लगातार लंबे समय से अभी तक यह कहावत विधानसभा में चरितार्थ हो रही है । नरसिंहपुर में तकरीबन 15 वर्षों से देखा जा रहा है कि क्या जिले में राजनीति में नूरा कुश्ती ही जारी रहेगी, विधानसभा बार मुख्यालय के बाहर से ही सत्तारूढ़ पार्टी के लोग विधायक प्रत्याशी देखने मिल रहे हैं। क्या स्थानीय विधायक प्रत्याशी यहां की आवाम को रास नहीं आ रहा हैं ।
यदि स्थानीय विधायक होगा तो शहर व क्षेत्र का चहुंओर  चहुमुखी विकास हो सकेगा ?


नगर की राजनीति में नेतृत्व क्षमता की कमी है क्या


हम बता दें कि  जिला मुख्यालय होते हुए नरसिंहपुर शहर में भारतीय जनता पार्टी व कांग्रेस पार्टी में शहर से बाहरी लोग ही नूरा कुश्ती का खेल खेलते रहेगें ! शहर के नेतृत्व करने में क्षमतावान नेता चुप्पी ही साधे तमासबीन बने रहेंगे, और यही हाल रहा तो सत्ताधारी व विपक्ष अपने तालमेल बिठाते हुए स्थानीय नेताओं को जीते जी लुप्त कर डालेंगे । ऐसे लोगों को किसी भी दलों से कोई सरोकार नहीं होता अपना व्यक्तिगत गठबंधन ही इन लोगों के बीच चलता है ।

 विधायक प्रत्याशी प्रवासी हो या स्थानीय

शहर में आए दिन नुक्कड़ नुक्कड़ पर जनचर्चा है कि विधानसभा क्षेत्र के अंदर से कोई स्थानीय विधायक बनता है तो क्षेत्र का विकास सुनिश्चित होता है एवं स्थानीय आवाम अपनी समस्याओं को लेकर अपने जनप्रतिनिधि से चर्चा भी कर सकता है चाहे स्वास्थ्य हो या शिक्षा सेवाएं या अन्य ?

 नगर में क्या-क्या होनी चाहिए व्यवस्थाएं

एक तरफ जिला अस्पताल करोड़ों की लागत से बनी लेकिन इस इमारत में उपकरण होने के बावजूद लोग दरबदर भटकते नजर आते हैं। डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों की कमी होने के कारण स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई है । किसी को कोई सरोकार नहीं है, सूत्र बताते हैं कि आए दिन कर्मचारियों को अपने मतलब निकालने और बढ़ावा देकर कुछक उच्चाधिकारी  कहीं कमीशनखोरी करते हैं और नए-नए हथकंड़े बनाते है व  कहीं भ्रष्टाचार करने वाले कर्मचारी को उच्च अधिकारी सुरक्षित करते देखे जाते हैं ‌। और जांच के नाम पर वह कर्मचारी सुरक्षित अपनी नौकरी बचाए रखता मसाज वाले मामले में वह उक्त व्यक्ति अभी तक धनपिपासुओं अपने हाथ लेकर सुरक्षित है। जिला अस्पताल से तंग आए मरीज  प्राइवेट अस्पताल मे विवश होकर जब मरीज व परिजन पहुंचते हैं तो वहां भी कोई लगाम नजर नहीं आती है । जांचो और इलाज के नाम मरीज ठग लिया जाता है जिसका प्रमुख कारण जांच और इलाज की फीस का निर्धारण ना होना है, "साहब जी" इसीलिए प्राइवेट अस्पताल लूटने में पारंगत हो चले हैं। और शासन प्रशासन मौन साधे हुए हैं !


ढर्रे पर चल रही शिक्षा व्यवस्था


सरकारी स्कूल कॉलेजो मे पर्याप्त विद्यार्थियों के लिए सीटें नहीं मिलती, और परिजन अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल और कॉलेजों में भेजने को मजबूर है, और प्राइवेट स्कूल कॉलेजों के संचालक, बच्चों के पालको को आर्थिक सुदृढ़ता देख हलाल करते हैं एक ही क्लास के विद्यार्थियों की फीस मे जमीन आसमान का अंतर अलग-अलग स्कूल कॉलेज में देखने को मिलता है, बात यहीं पर खत्म नहीं होती कहीं एनुअल फंक्शन तो कहीं एडमिशन फीस के नाम पर भी मोटी रकम ऐठ ली जाती है, क्योंकि शासन व प्रशासन ने प्राइवेट स्कूल कॉलेज संचालको को जो खुली छूट दे रखी है !

 नरसिंहपुर व करेली नगर की आधारभूत संरचना कैसी हो

नरसिंहपुर व करेली में औद्योगिक/व्यवसायिक विकास को लेकर बड़ी राजनैतिक पार्टियां स्थानीय समस्याओं को दरकिनार कर अपनी डफली अपना राग चला रही है, यही कारण है कि विकास की गति थमी हुई है ! नगर मे ना तो व्यवस्थित रोड है, और ना उचित पार्किंग का तो इन नगरों में टोटा बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रो से नगर तक आने के लिए बस सर्विस सेवाओं की कमी नागरिकों को खलती रहती है ।
                    उक्त  दोनों नगरों में सुलभ कांपलेक्सो की कमी है,जो है उनमें गंदगी का अंबार अटा पड़ा हुआ होता है शासन प्रशासन ने इन नगरों के लिए अभी तलक कोई मास्टर प्लान नहीं बनाया जिस कारण औद्योगिक व्यवसायिक विकास रुका हुआ है !

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