नायब तहसीलदार द्वारा 24 घंटे का अल्टीमेटम अन्यथा मिटाए जाएंगे गरीबों के आशियाने*

 कलेक्टर द्वारा गरीबों को दिए गए आश्वासन ,नायब तहसीलदार ने कलेक्टर के आदेश को ताक पर रखकर गरीबों को दिए अतिक्रमण के नोटिस
 यूं तो संपूर्ण जिला प्रशासन को ज्ञात होगा कि यह गरीबों के आशियाने तकरीबन अरसा बीत रहा है और इन्हें सत्तारूढ़ पार्टी अपनी हठधर्मिता के चलते प्रशासन पर दबाव बनाते हुए इन गरीबों को बेघर करने की जो ठान रखी है यह पूर्णता गलत है इसका खामियाजा सत्तारूढ़ पार्टी के लिए नुकसानदायक होगा ।
हम बता दें कि पूर्व में भी गरीबों के मकानों पर अधिकारियों द्वारा अतिक्रमण की कार्यवाही के नाम पर तोड़फोड़ की जा चुकी है जिसका  खामियाजा आज तक स्थानीय गरीब आवाम भुगत रही है !
संपादक हेमराज विश्वकर्मा 

HR Times News नरसिंहपुर  :- सांकल तिराहे से सड़क किनारे दिए गए थे 1984 में पट्टे, किंतु 21,22 घरों के पट्टे के पीछे एक दबंग मालगुजार की जमीन आ रही है जिसने शासकीय प्रपत्र में फेरबदल कर मालगुजार की जमीन के आगे आने वाले पट्टेधारियों को अतिक्रमण करार दिला दिया है !
              स्थानीय बाशिंदों का कहना है कि उक्त प्रकरण न्यायालय मे भी गया था किंतु मिलीभगत से अधिकारियों ने गलत तथ्य पेश किए जिस पर न्यायालय ने गरीबों को सर्व सुविधा युक्त विस्थापित करने का आदेश दिया था । किंतु आज दिनांक तक प्रशासन द्वारा व्यवस्थाओं के अभाव में गरीबों को विस्थापित नहीं किया गया !
         दूसरी तरफ मालगुजार अपनी भूमि के सामने आने वाले पट्टे धारियों पर अतिक्रमण की  कार्यवाही कराकर अपनी भूमि के दाम बढ़ाने में लगा हुआ है, परेशान पट्टेधारियों ने जिला कलेक्टर को दिनांक 28 फरवरी 2023 जनसुनवाई मे शिकायत की थी जिस पर कलेक्टर महोदया ने शिकायतकर्ताओं से पूछा कि आप क्या चाहते हो, जिस पर सभी ने जस का तस रहने की बात कही, और कलेक्टर महोदया ने उन्हें आश्वासन दिया कि ठीक है ! बावजूद नायब तहसीलदार नर. द्वारा दिए नोटिस मे दिनांक 31/3/2023  दर्ज है और पूर्णिमा के दिन जब सारा शहर जवारे उत्सव में लगा रहा मौका पाते ही नायब तहसीलदार द्वारा 4 अप्रैल को पट्टे धारियों को सौंप दिया गया, जिस नोटिस के अनुसार 5 अप्रैल तक कब्जा हटा लेने की बात कही गई है । अन्यथा बलपूर्वक कार्यवाही की जावेगी ! 

यह हठधर्मिता नहीं तो क्या है साहब ?

स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसों से निवासरत गरीबों के आशियाने एक धनपिपाशु का पक्ष लेते हुए 31 तारीख का नोटिस 4 अप्रैल में दिया जाता है, और नोटिस के अनुसार 24 घंटे के अंदर खाली करने की बात नोटिस में कही गई है।और पट्टे धारियों को अपना बचाव रखने तक का समय नहीं दिया गया है !
           हैरानी की बात यह है कि  जब 28 फरवरी 2023 को स्वयं कलेक्टर महोदया पट्टेधारियों को आश्वासन देती हैं ! और नायब तहसीलदार अतिक्रमण कार्यवाही का नोटिस देते है तब तो स्थिति समझ के परे है !
जबकि वास्तविकता यह है कि यदि अतिक्रमण के अंतर्गत पट्टे धारियों की भूमि आ रही होती तो कम से कम 40 से 50 मकान अतिक्रमण में आते किंतु केवल मालगुजार की भूमि के सामने ही पट्टे धारियों के मकान अतिक्रमण में क्यों आ रहे हैं, यह  अधिकारियों की कारगुजारी का ही नतीजा है, कि मालगुजार को सीधा फायदा पहुंचाने के लिए अधिकारी कवायद में लगे हुए हैं !
                     एक तरफ तो केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार तक गरीबों के आशियाने बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही हैं दूसरी तरफ पेपरों में हेराफेरी कर कुछ अधिकारी बने बनाए आशियाने को मिटाने को आमादा है !

             उक्त प्रकरण मे अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति संगठनों के अखिल भारतीय परिसंघ जिला अध्यक्ष  एनके नरवरिया  ने अधिकारियों को सतर्क किया है कि तत्काल तुगलकी फरमान वापस किए जाए, यदि गरीबों के आशियाने में किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ की जाती है तो अधिकारियों के विरुद्ध अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति प्रताड़ना अधिनियम के तहत कार्यवाही कराने पर परिसंघ बाध्य हो जाएगा। जिसके लिए जिला प्रशासन में विराजमान अधिकारी वर्ग ही स्वयं व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार रहेंगे !

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