जिन हाथों मैं पेनसिल सें लिखना चाहिएं। स्कूल के बच्चें उन्ही हाथों से पेलेट धो रहें हैं शर्मशार

दमोह मध्यप्रदेश
संवाददाता - लक्ष्मण रैकवार
स्कूल में बच्चे खुद धो रहे हैं झूठे बर्तन
जिन हाथों में कलम थामना थी, उन्हीं हाथों से जूठे बर्तन धोता बचपन अफसरों को खुली आंखों से भी दिखाई नहीं दे रहा। बेपरवाही का ये आलम और कही नहीं बल्कि शिक्षा गुणवत्ता का जिम्मा संभालने वाले पटेरिया माल  स्कूल से सामने आया है। दावा तो बच्चों के उजले भविष्य का हो रहा है, लेकिन हकीकत दावों से कोसो दूर।जूठे बर्तन साफ करना पटेरिया माल स्कूल की रोजमर्रा की बात यह । शिक्षकों के सामने प्राथमिक स्कूल के नन्हें बच्चे लगभग रोज ही जूठे बर्तन साफ करने को मजबूर है।
शासन के नियम के अनुसार बच्चों को मध्याह्न भोजन बनाना, परोसना और बर्तन साफ करने की जवाबदेही संबंधित स्वसहायता समूह की रहती है। शिक्षकों के सामने यह अनियमितता होती है प्राथमिक स्कूल में समूह संचालक  उपस्थित बच्चों की संख्या देख भोजन रख चले जाते हैं। यहां भोजन परोसने से लेकर बर्तन साफ करने का कार्य बच्चे ही करते हैं।

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