मुख्यमंत्री गौवंश योजना की दास्ता,गांव की गौ शाला मैं भूख प्यास से मर रहें गौ वंश

गांव की गौशाला में भूख प्यास से मर रहीं  गौवंश
गौशाला में हर तरफ अव्यवस्था का आलम

 लो०नरसिंहपुर/सालीचौका 
HR TIMES NEWS  :- हर जगह हर तरफ  गाय व अन्य पशुओं की हालत लगातार खराब बनी हुई है, जबकि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री गौ सेवा योजना के तहत बनी गौशालाओं में अव्यवस्था एवं गोवंश को चारा पानी उपलब्ध ना होने के कारण गौशालाओ में गायों की कब्रगाह बन रही हैं सूबे की शिवराज सरकार एक तरफ गोवंश संरक्षण को लेकर तमाम प्रयास में जुटी हुई है।
 लेकिन उसकी जमीनी हकीकत बेहद चौंकाने वाली है मामला चीचली विकासखंड के ग्राम पंचायत छैनाकछार-ए के ग्राम नयाखेड़ा का है,
यहां बनी गौशाला में रोजाना गोवंश की मौत हो रही है गौशाला के अंदर की तस्वीरें बेहद हैरान करने वाली हैं  गाय सर्फ हड्डियों का ढांचा मृत गोवंश को तो गांव के बाहर खुले में फेंक दिया जाता है बीमार गायों का इलाज भी नहीं कराया जाता ग्रामीण असमय हुई गाय की मौतों का आरोप संचालकों एवं प्रशासनिक अमले पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं यह बात भी सामने आ रही है कि गौशाला संचालक गायों को चारों और पानी नहीं देने से असमय गाय काल के गाल में समा रही हैं मैं नयाखेड़ा स्थित गौशाला में गोवंश की दर्ज संख्या 50 बताई जा रही है लेकिन हकीकत में दिनों दिन यह संख्या कम हो रही है

गौपालन एंव पशु संवर्धन बोर्ड
गाय हितेषी शुभचिंतक बताने वाली मध्य प्रदेश सरकार ने गोपालन एवं पशु संवर्धन बोर्ड का गठन किया और प्रति गाय का खर्च ₹20 कर दिया लेकिन गौशालाओं के हालात नहीं सुधरे जनपद पंचायत चीचली के अंतर्गत लगभग 10 गौशाला में संचालित  रही है अमूमन सभी यही हाल हैं

गौ माता पर सियाशत और कुछ नहीं
गाय और गौशालाओं पर पिछले कुछ साल से जमकर सियासत का रंग चढ़ा है कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही राजनीतिक दलो ने खुद को गाय सेवक बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन इसके बावजूद गोवंश की हालत सुधरे नहीं हैं गौशालाओं की निगरानी इमानदारी से नहीं हो रही है यह सवाल उठता है कि मध्यप्रदेश में गायों पर जितनी  सियासत हुई है क्या इतनी सेवा भी हो पाई

कहां जा रहा हैं रूपया
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि सरकार ने अगल से बोड बना दिया हपर्याप्त बजट भी दिया जा रहा है फिर क्या वजह है कि गाय बेमौत मारे जा रही है शायद उस बजट का सही इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है उससे भी बड़ी बात यह कि निगरानी के लिए बोर्ड बनाया गया है लेकिन लेकिन ना निरीक्षण ना जांच ना कार्रवाई जिसकी वजह से गौशाला संचालक मनमानी कर रही है और गाय काल के गाल में समा रही है 2020 से नयाखेडा की गौशाला स्व सहायता समूह द्वारा संचालित की जा रही है 2 साल बीतने को हैं लेकिन जिला के आला प्रशासनिक अधिकारियों ने आज तक गौशाला का निरीक्षण भी नहीं किया
 
आवारा नहीं बेसहारा हैं गौ वंश
क्षेत्र में खुलेआम गोवंश चारा पानी की तलाश में दर दर् की ठोकर खाते हुए घूम रहा है जिनको कुछ लोग आवारा मवेशी भी कहते हैं लेकिन हकीकत है पशुपालक अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए सड़कों पर गोवंश को  बेसहारा छोड़ रहे हैं हिंदू धर्म की मान्यता अनुसार गाय को मां का दर्जा दिया गया है लेकिन कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ पूर्ति करने के बाद उसी गौ का दूध दही घी या खाकर बीच सड़क पर छोड़ देते हैं

संचालकों को हटानें एंव व्यवस्था परिवर्तन की उठी मांग !

समूह संचालकों द्वारा मनमानी से संचालन करने पर एवं गौशाला में रह रही गायों को खुला छोड़ दिया जाता है जिससे आसपास के किसानों की फसलों को नुस्कान पहुंच रहा है ग्राम के किसानों ने कई बार  संचालकों से नतिजा सिफर निकला 

अबैध अतिक्रमण से कब मुक्त होगी गौ शाला की जमीन
गौशाला के चारो और भारी अवैध अतिक्रमण कारियों ने कब्जा कर लिया और साथ ही उक्त जमीन पर फसलें उगा कर काश्तकारी की जा रही है प्रशासन को कई बार अतिक्रमण हटाने के लिए के लिए शिकायतें भी हुई लेकिन आज तक गौशाला की जमीन अतिक्रमण मुक्त जिला प्रशासन नहीं करवा पाया।

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