*करेली पुलिस की ढील कर, मनचलों के हौसले बुलंद*

करेंली पुलिस की डील, मनचलों के हौंसलें बुलंद

स्कूल कॉलेज खुलने व छुट्टी के समय लगता है मनचलों का जमावड़ा

संवाददाता राजा गोस्वामी की रिपोर्ट
HR TIMES  NEWS करेली              
नारी सुरक्षा,आत्मरक्षा,महिला सशक्तिकरण जैसे अभियानों के बावजूद लड़कियों और महिलाओं के रोजमर्रा के जीवन में होने वाली छीटाकशी की समस्या का सामना करना पड़ता है। खासतौर पर स्कूल व कॉलेज जाने वाली छात्राओं को इस समस्या का सामना करना पड़ा रहा है। महिला सशक्तिरण के नाम पर सिर्फ ढिढोरा पीटा जा रहा है। तमाम संगठन सिर्फ कागजों पर ही हैं। निर्भया नारी शक्ति के दावे सच्चे साबित होते नजर नहीं आ रहे हैं। पुलिस की लापरवाही के कारण छात्राओं और महिलाओं को काफी परेशानियों से गुजरना पड़ रहा हैं। पुलिस इस बात का इंतजार करती है कि कोई शिकायत करे तो कार्रवाई को जाए। जबकि लड़कियां परेशान होने के बावजूद परिवारिक व समाजिक प्रतिष्ठा के चलते शिकायत करने के लिए सामने नहीं आ पाती है। यही वजह है कि शिकायत के अभाव में पुलिस कार्रवाई नहीं होने से मनचलों के हौसले इतने बढ़े हुए है, कि वे सड़क से गुजरने वाली हर लड़की पर कमेंट करते हैं।

स्कूलों व कोलेंजो के बाहर लगा रहता हैं जमावडा़
स्कूल-कॉलेज खुलने और छुट्टी के समय आसपास मजनू बाइक या पैदल ही खड़े हो जाते हैं। हार्न का शोर-शराबा शुरू हो जाता है। इससे जाम की स्थिति बन जाती है इसी भीड़-भाड़ और शोर-शराबे के बीच मजनू लड़कियों पर कमेंट करके उन्हें रोज परेशान करते हैं। लेकिन छात्राओं की सुरक्षा के लिए न तो स्कूल व कॉलेज प्रबंधक कोई व्यवस्था नहीं करते हैं और न पुलिस के जवान मौजूद रहते हैं। ऐसे में छीटाकशी की घटनाएं होती रहती हैं। शहर में स्कूल कालेज खुलने व बंद होने के समय सड़कों पर मंडराने वाले मजनुओं पर पुलिस का कोई अंकुश नहीं है। छीटाकशी के कारण बालिकाएं स्कूल जाने से घबराती हैं। पुलिस इनके खिलाफ अभियान चलाना जरूरी नहीं समझती।इसका परिणाम ये होता है कि छात्राओं की समस्या का समाधान नहीं होता है।
खासकर शहर के महात्मा गांधी कॉलेज,शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इन करतूतों के करने का गढ़ बन चुका है कॉलेज में व स्कूल के आसपास भी मनचले युवक मंडराते रहते हैं।जो लड़कियों के आने-जाने के समय पर किसी न किसी बहाने से वहां खड़े हो जाते हैं और वहां से गुजरने वाली लड़कियों पर कमेंट करते रहते हैं। छुट्टी के समय लड़कियों के बाजु से तेज रफ्तार से गाड़ी निकलना इनका फैशन बन गया है पुलिस भी कभी वहां खड़े युवाओं से वहां मौजूदगी के बारे में कोई पूछताछ नहीं करती है।

छीटाकशीं के लिए यें हैं कानून व्यवस्था

महिलाओं के साथ होने वाली छेड़छाड़ या उत्पीडन के मामले में आइपीसी की धारा 354 के तहत केस दर्ज किया जाता है। भारतीय दंड संहिता की धारा 354 का इस्तेमाल ऐसे मामलों में किया जाता है, जहां स्त्री की मर्यादा और मान सम्मान को क्षति पहुंचाने के लिए उस पर हमला किया गया हो या उसके साथ गलत मंशा के साथ जोर जबरदस्ती की गई हो अथवा बुरी नीयत से छेड़छाड़ व छीटाकशी की गई हो। भारतीय दंड संहिता( आइपीसी) के मुताबिक धारा 354 के तहत आरोपी पर दोष सिद्ध हो जाने पर दो साल तक की कैद या जुर्माना या फिर दोनों की सजा हो सकती है।

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